Unfinished Story of Bhopal 1984

About भोपाल गैस त्रासदी/Bhopal Gas Tragedy:-

भोपाल आपदा(Bhopal Disaster) या कहें भोपाल गैस त्रासदी(Bhopal Gas Tragedy)  दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदा है | यह 2 और 3 दिसंबर को वर्ष 1984 में  भोपाल, मध्य प्रदेश में स्थित यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड/Union  Carbide India Limited(UCIL) कीटनाशक संयंत्र से गैस के रिसाव से घटित हुई थी |

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40 टन विषाक्त गैस Methy-Iso-Cynate(MIC) गलती से भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड(UCIL) के संयंत्र से लीक हो गई और शहर भर में फैल गई| जिसका परिणाम  एक बुरे सपने जैसा था जिसका अभी भी कोई अंत नहीं है| गला घोटने वाली गैस ने निवासियों  की आँखे खोल दी और  वे सुबह से अंधेरे सड़कों के माध्यम से अस्पतालों में पहुँचने लगे| शहर में लगभग 5 लाख लोग इस घातक गैस से प्रभावित हुए| राज्य सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुर्घटना में 3500 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई और 8000 से अधिक लोगों की अब तक की मृत्यु हो चुकी है |जो लोग बच गए उनके फेफड़े , मस्तिष्क , आंख, मांसपेशियां, तंत्रिका विज्ञान, प्रजनन और प्रतिरक्षा प्रणाली को गंभीर रूप से प्रभावित किया|

सरकार दुर्घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को नहीं ला सके और न्याय के लिए गुहार लगाने वाले दुर्घटना में मर चुके और अपंगों के परिवार पिछले 30 वर्षों में एक हजार बार मर चुके हैं।कुछ महीनों पहले यूनियन कार्बाइड के पूर्व अध्यक्ष वारेन एंडरसन (त्रासदी का मुख्य आरोपी) का संयुक्त राज्य अमेरिका में अपना सारा  जीवन स्वतंत्रता के साथ जीने के बाद निधन हो गया ।पर वह अपने पीछे भारतीय न्याय प्रणाली पर स्थायी सवाल छोड़ गया |

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About भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र/Bhopal Memorial Hospital and Research Center(BMHRCS):-

भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार भोपाल गैस त्रासदी (1984 )के पीड़ितों को सेवाएं, तृतीयक स्तर सुपर स्पेशियलिटी उन्नत देखभाल प्रदान करने के लिए शुरू किया गया था|

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भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र को शुरू करने का उद्देश्य निम्नानुसार था :-

  1. सभी पंजीकृत गैस पीड़ितों और उनके हकदार आश्रितों को राज्य की अत्याधुनिक सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करना |
  2. अस्पताल में सभी बुनियादी ,नैदानिक ​​और महामारी विज्ञान के अनुसंधान  की सुविधा देना |
  3. मानव ऊतक पर मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) के दीर्घकालिक प्रभाव का निर्धारण करना निष्कर्षों के आधार पर इलाज के तौर तरीकों की योजनाएं बनाना |
  4. डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए मौजूदा बुनियादी ढांचे का उपयोग करना |
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