Goods and Services Tax (GST Bill) के बारे में जानें |

अप्रत्यक्ष करों (Indirect Taxes) की वर्तमान संरचना भारत में बहुत जटिल है | वस्तुओं और सेवाओं (Goods & Services) पर केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा कई तरह के कर लगाए जाते हैं |

हम फिल्म देखने के लिए मनोरंजन कर (Entertainment Tax) का भुगतान करते हैं | वस्तुओं और सेवाओं (Goods & Services) के क्रय पर मूल्य वर्धित कर/Value Added Tax (VAT) का भुगतान करते हैं और उत्पाद शुल्क (Excise duties), आयात शुल्क (Import Duties), लक्जरी टैक्स (Luxury Tax), केन्द्रीय बिक्री कर (Central Sales Tax), सेवा कर (Service Tax) जैसे अन्य बहुत से करों का भुगतान करते हैं |

आज इन करों में से कुछ केंद्र सरकार द्वारा और कुछ राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाता है |कितना अच्छा होगा यदि इन सभी करों के बजाय केवल एक एकीकृत कर लगाया जाये |

GST

 Goods and Services Tax Bill (GST)क्या है ?

वस्तु एवं सेवा कर विधेयक (Goods and Services Tax Bill) or GST Bill को आधिकारिक तौर पर The Constitution (One Hundred and Twenty-Second Amendment) Bill, 2014 के रूप में जाना जाता है | भारत में GST अर्थात राष्ट्रीय मूल्य वर्धित कर (National VAT) को 1 अप्रैल 2017 से लागू करने का प्रस्ताव है | इस प्रणाली से मुख्य अपेक्षा है के सभी अप्रत्यक्ष करों (Indirect Taxes) को समाप्त कर केवल GST Tax लगाया जाएगा। जैसा की नाम से ही विदित है कि यह कर उपभोक्ता पर वस्तु और सेवा की खरीद पर लगाया जायेगा | इसका मतलब है कि अन्य सभी छोटे अप्रत्यक्ष करों को समाप्त कर एकल व्यापक कर लगाया जायेगा |Goods and Services Tax

GST को सबसे पहले 2007-08 के बजट सत्र के दौरान पेश किया गया था | 19 दिसंबर 2014 को GST Bill को लोकसभा में पेश किया गया था | केंद्रीय वित्त मंत्री इसके चैयरमेन होंगे तथा काउन्सलिंग के 2/3 सदस्य राज्यों के तथा 1/3 सदस्य केंद्र के होंगे | इस विधेयक में अगर कोई भी नया लागू करना हो तो 3/4 बहुमत जरुरी होगा |

GST भारत में कैसे प्रशासित किया जाएगा :-

GST के 2 घटक हैं – Central GST (CGST) और State GST (SGST) | केंद्र और राज्य दोनों एक साथ मूल्य श्रृंखला में GST लगाएंगे | कर हर वस्तु और सेवाओं पर लगाया जाएगा | एक राज्य के भीतर होने वाले सभी लेन-देन पर केंद्र सरकार केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर /Central GST (CGST) वसूल करेगी और राज्य सरकार राज्य वस्तु एवं सेवा कर /State GST (SGST) वसूल करेगी |

Goods and Services Tax के लाभ :-

    • कर ढांचा बहुत सरल बनाया जाएगा |
    • यह कई करों को हटा देगा |
    • यह भारत में एक बाजार बना देगा |
    • यह वस्तुओं और सेवाओं एक ही दर पर कर लगाता है जिससे कई कर विवादित मामले समाप्त हो सकते हैं |
    • यह Manufactures पर करों को कम कर देगा जिससे उनके व्यापार में बृद्धि होगी और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी और बढ़ेगी |

GST ke labh

  • Credit का एक सहज प्रवाह देश भर में उपलब्ध होगा | जिससे भ्रष्टाचार काम से काम होगा |
  • यह निर्यात उन्मुख व्यवसायों के लिए अच्छा है। क्योंकि यह उन माल / सेवाओं के लिए लागू नहीं होगा जो भारत से बाहर निर्यात किये जा रहे हैं  |
  • लंबे समय में, कम कर बोझ उपभोक्ताओं के लिए वस्तु पर कम कीमत में बदल सकता है |
  • यह और अधिक पारदर्शिता और बेहतर अनुपालन ला सकता है |
  • अधिक व्यावसायिक संस्थाएं कर प्रणाली के अंतर्गत आ जाएंगी और इस प्रकार कर आधार और विस्तृत हो जायेगा | और आगे चल कर यह बेहतर और अधिक कर राजस्व संग्रह करने के लिए नेतृत्व कर सकता है |
  • कंपनियां जो असंगठित क्षेत्र के तहत कार्य कर रही हैं कर व्यवस्था के अंतर्गत आ जाएंगी |

GST-blog

Goods and Services Tax की हानियां :-

  • सेवाओं पर कर 14% से बढ़कर 20 % तक हो सकता है |
  • खुदरा  (Retails) पर कर लगभग दोगुना हो जाएगा।
  • आयातित वस्तु पर लगभग 6 % से अधिक की दर से कर लगाया जाएगा |
  • हर व्यवसाय पर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दोहरा नियंत्रण हो जाएगा जिससे अनुपालन लागत (Compliance Cost) बढ़ जाएगी |
  • सभी Credit GST Network के साथ Online Connectivity से उपलब्ध हो जाएगा पर छोटे व्यवसायों के लिए यह प्रणाली उपयोग करने में मुश्किल आ सकती है |

विपक्ष क्यों विरोध कर रहा है :-

  • कांग्रेस भी वही कर रही है जो भाजपा ने किया जब कांग्रेस विधेयक पारित करना चाहते थे | तो यह राजनीतिक है |
  • राज्यों अपने कर की दरों को बदलने की स्वायत्तता (Autonomy) खो सकते हैं |
  • वस्तु पर Inter-state movement के नाम पर 1% का अतिरिक्त कर लगेगा जो GST की भावना के खिलाफ है |
  • विनिर्माण राज्य अपना बड़ा राजस्व खो देंगे |

GST प्रणाली को लागू करने के लिए चुनौतियां :-

  • Goods and Services Tax बिल अभी भी लोकसभा से पारित होने के लिए पेश किया जाना है |
  • सेवा क्षेत्र का विरोध कर सकते हैं , क्योंकि उन्हें केंद्र और राज्य सरकार के साथ हर राज्य में पंजीकरण कराना होगा | अर्थात अखिल भारतीय स्तर के हर व्यवसाय को लगभग 60 पंजीकरण कराना होगा , जबकि वे अभी सिर्फ एक कराते हैं जिससे उनकी दरें भी ऊपर जा सकती हैं |
  • खुदरा व्यापार इसका विरोध कर सकते हैं , क्योंकि उनकी कर दरें बढ़ जाएँगी और उन्हें अब राज्य सरकार के साथ-2 केन्द्र सरकार से भी Deal करना होगा |
  • कभी-2 GSTN कुछ समय के लिए बेहतर काम नहीं कर सकते |
  • दोहरा नियंत्रण कारोबार के लिए परेशानियां बढ़ा सकता है |
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